उसका साथ

जो चलना पड़े उसके साथ,तो मुझे धूप में तपती अपने पाँव ही पसंद है। जो खाना पड़े उसके साथ,तो मुझे उसके साथ सूखी रोटी ही पसंद है। जो सोना पड़े उसके साथ,बिस्तर की जगह उसकी बाँहें ही पसंद हैं। और सुनो, तुम रखो न महल,मुझे उसके साथ बैराग ही पसंद है। — Writer Sakshi Parmar