तुम अक्सर पूछते हो!

मैंने देखा है, तुम अक्सर पूछते हो,“क्या मानती हो तुम मुझे?” और मैं अक्सर कह देती हूँ,“क्या जानते हो तुम मुझे?” कभी मेरी आँखों में उतरकर देखना,शायद वहाँ तुम्हें कई अनकही बातें मिल जाएँ। मैं हर बात कह नहीं पाती,हर दर्द दिखा नहीं पाती,और हर बार मुस्कुराने का मतलब खुश होना भी नहीं होता। तुम … Read more

माँ का अनमोल प्यार

ममता की जो मूरत होती,जिसकी गोदी सबसे प्यारी।जिसकी लोरी सुनकर सोए,यह दुनिया की खुशियाँ होती। खुद भूखी रहकर जो हमको,हँसते-हँसते अन्न खिलाती।थोड़ी सी भी चोट लगे तो,जिसकी आँखें भर-भर आती। उँगली पकड़कर चलना सिखाया,गिरा तो दोबारा उठना बताया।सारे रिश्ते-नाते झूठे,पर माँ का नाता सच्चा। अँधेरे में जो राह दिखाए,दीप बनके जलते जाए।अपने आँचल की छाया … Read more

कैसे समझाऊं तुम्हें by Rabiya Nizam

Kaise Samjhaun Tumhe

कैसे समझाऊं तुम्हें? कि ये चुप्पी चुभती है मुझे भय उत्पन्न करती है, उस पुराने खंडहर की तरह, जो सदियों से खड़ा, अमूक, नि: श्वास, नि: शब्द समाए अपने भीतर असंख्य हृदय की वेदना- गाथा ! कैसे समझाऊं तुम्हें? कि पल-पल  करती हूं मैं तुम्हारा इंतज़ार, रात की शीतलता से मुरझाए सूरजमुखी की तरह, कि … Read more