श्रेणी: Hindi Poetry
ज़िम्मेदारियों की ज़ंजीर
कभी दिल कहता है छोड़ दे ये नौकरी,साँस भरकर अपने सपनों की राह पकड़ ले।पर घर की दीवारें पूछ लेती हैं,“तेरे बिना चूल्हा कैसे जल पाएगा?”नौकरी छोड़ने का डर हर सुबह आँखों में उतर आता है,और हौसले का सूरज ढक सा जाता है।दिल चाहता है सच बोल दूँ, ग़लत को ग़लत कह दूँ,पर होंठों पर…
मेरे सपनों का भारत
यह बदलता भारत देश हैप्यारा वतन मेरा और तुम्हारा हैविविधता और आध्यात्म से भरानिराला इतिहास हमारा है नई राह मिली है, उस परदेश को आगे बढ़ाना है ।विश्व की सर्वोच्च राजगद्दी परभारत को बिठाना है!विभिन्न जातियों और धर्मों कोएक साथ मिलाना हैज्ञान – विज्ञान की तकनीकों सेदेश को गौरव दिलाना है! अपने प्राणों पर खेलकर…
मन के भारत की तस्वीर
मेरे मन का भारत वह है,जहाँ विविधताकेवल शब्द नहीं, एक लय है,जो मंदिर की घंटियों से लेकरमस्जिद की अज़ान,गिरिजाघर के प्रार्थना-गीतऔर गुरुद्वारे की वाणी मेंएक ही सुर साधती है।जहाँ शिक्षा केवल अक्षर-ज्ञान नहीं,बल्कि आत्मा का प्रकाश है,जो गाँव की पगडंडी से लेकरशहर की गलियों तकहर बच्चे की आँखों मेंसपनों का दीप जलाता है।जहां खेतों में…
माथे पर है विश्वगुरु का तिलक
भारत कोई नक्शे का टुकड़ा नही युगों से सनातन का मुखड़ा है वही।ऋषि मुनि, वीरता की भूमि है भारतमिटाने वाले मीट गये, मिटा नही भारत। माथे पर है विश्वगुरु का तिलक भुजाओं में है शिव-शक्ति की झलक।सवारी शेर की करता है भारत पहले वार नही करता है भारत। विकास पथ पर कदम है अग्रसर दिल-दिमाग…
क्या खूब नज़ारा था
क्या खूब नज़ारा थामानो गीता – कुरान का मिलाप थाहिन्दू बहन राखी खरीद रही थीमुस्लिम भाई बेच रहा था ।वो बोली, “भैया दाम कुछ तो कम करो”उसने कहा, “बहन आप समझ कर दे देना”रास्ते की रेकड़ी थी, खिचा-तानी थोडी़ तो होनी थी ।सौदा हुआ, हिन्दू बहन ने हरी राखी खरीदीमुस्लिम भाई ने केसरया राखी फ्री…
है वह ऐसा पिता
हार जाता है वह संघर्षों तले,आह भी ना निकाले है, वह ऐसा पिता।कैसे आंगन की हरियाली, इतनी हरी मां तो है,पर संभाले जड़ है पिता।जोड़ती हूं खुद की कमाई,कौड़िया उतनी ही कौड़ी में,संभाले घर है पिता।हार जाता है वह संघर्षों तले, आह भी ना निकाले है, वह ऐसा पिता।By रिचा पाठक मैं रिचा घनश्याम पाठक…
अब शिकायत करना बंद करते हैं
” अब शिकायत करना बंद करते हैं, और संघर्ष करना शुरू करते हैं “ कब तक आंसुओं से पन्ने भरेंगे ,कब तक दर्द की दास्तां कहेंगे ।अब वक्त है शिकवा छोड़ने का ,अब वक्त है खुद को मोड़ने का ।कब तक कहे – ‘ हम तो औरत हैं ‘ ,कब तक कहे – ‘ हमबेबस…
श्मशान घाट ज़मीर के लिए
एक तरह का श्मशान घाट कम है इंसानों के लिए इंसान मरता है कई तरह एक जिंदगी जीने के लिए अलग होना चाहिएश्मशान घाट ज़मीर के लिए कुछ इंसान मरते बाद में है ज़मीर उनका पहले ही मर जाता है _________©️ डॉ हितेंद्र मेहता
प्यार सा अजनबी दर्द
क्यों मुझे हमेशा एक पहचानी सी दर्द सताती है, मिली हुई तकदीर को भी ख्वाब बताती है,खो ना दू नायाब तहफ़े को जहन में हर सुबह क्यू चली आती है, मन बहलाने को कुछ अल्फाज सजा कर भ्रम मिटाती हैं!सच्चाई से मज़बूत होता रहे यह रिश्तों का बंधन, हर रोज़ सजदे में सिर झुकाती है।हां…
