तुझ में वह शक्ति है

हार गए तुम छोटी सी जंग मेंजीत गया क्या सब जग मेंघबराने से मिल क्या जाएगाक्या रो के तू सब कुछ पा जाएगामानव के तन मन पर भारीपड़ जाता है ये मानसिक बीमारीक्यों सोच कर बातों को तू घबराता हैअंधेरी रात में रोते-रोते सो जाता हैतुझ में वह शक्ति है यारीकर सकता है नष्ट तू … Read more

समय

समय की अदभुत रीति है, ये सिर्फ मुस्कुराहट नहीं कई दर्द भी देती हैं….शब्द से भी चुन कर जीवन में कई तरह के जंग लड़ने देती हैं! हजार बार भी हरा कर हर बार एक नई संरचना देती है, ये समय की सीमा है जो इसे इतना कीमती बना देती हैं।by Sakshee Mishra

अंतर्मन की चीख

अंतर्मन की चीख मां का दूध छुड़ाकर जब, अम्मा ने पानी पिलाया था, वो काम कर सके घर भर का, यह सोचकर मुझे रुलाया था, तब चीख रहा था अंतर्मन.. कुछ पूछ रहा था अंतर्मन… भैया को खिलौने नए-नए, मुझको मिलते थे रहे सहे, मक्खन, मलाई, फल, मिठाई, मेरे हिस्से सुखी रोटी ही आई, तब … Read more

अब फर्क नहीं पड़ता

शिकवा लोग से करना छोड़ दिया है, हमने थोड़ी सी खुशी के लिए मरना छोड़ दिया है। अब आए तो फर्क नहीं जाए तो फर्क नहीं, कुछ इस तरीके से हमने खुद को रोक लिया है। और शिकवा हमने करना छोड़ दिया है, अब रूठना छोड़ दिया है, मनाना छोड़ दिया है, जमाने को गम … Read more

लम्हों के मोहताज

आसमान का सितारा बन कर , क्या मिला सब के आंखों का तारा बन कर। बनना चाहा जिंदगी किसी की, रह गये तमाशा बन कर। ढुढा सारे जहां में मिला कहीं नहीं, पता नहीं खोई कहाँ हे, ये किस्मत की लकीर। जो मिलेगा कभी नहीं। ये खेल किस्मत की है, वरना कोई मिल कर खोता … Read more

थी एक बच्ची

थी एक बच्ची सीधी साधी सी करती थी नादानी वो बड़ी प्यारी सी तोड के जंजीरे वो उरना चाहती थी आसमान का शेर वो करना चाहती थी की जिम्मेदारी से इस कदर दबी की मुस्कुराना छौड दिया इतनी बदनाम हुई की ज़माने को गम बताना छौड दिया थी अल्बैली वो दीवानी सी करती थी बतीया … Read more

सोने की चिड़िया- मेरे सपनों का भारत

मेरे सपनों का भारत, जहाँ रहते हों सब मिलजुल कर, हो भाई चारा। ना आमदनी की चिंता, ना खर्चने का दुख… अमन चैन हो चारो ओर। यह अमीरी और गरीबी से परे हैं भारत…. जाती के भेद भाव से परे है ये भारत। ये कर्म भूमि है बरसों से… इसे कर्मों ने ही बिगाड़ा है … Read more

एकता

आज़ाद हुआ वतन मेरा हर बेड़ी से हर बंदिश से आज़ाद हैं हम भारत वासी अब ज़ुल्म से और रंजिश से। हर रंग हर मज़हब हर ज़ात,सबसे पहले इंसान हैंहम नहीं किसीके वोट बैंक,हम अपने वतन की जान हैं। by Dr. Tarannum Shaikh

मेरे सपनों का भारत — भविष्य का भारत कैसा हो

मेरे सपनों का भारत वो भारत हैजिसमें सब हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई एक हैं दुश्मन कोई आँख उठाए तो, ऐ भारत माँ!तेरी रक्षा की ख़ातिर हम सब भाई एक हैं जात पात का भेद न होमजहब की कोई दीवार न होभाषा बोली क्षेत्रवाद कीबीमारी का कोई बीमार न हो गाँव गली घर कूचे मेंगंदगी के … Read more

मेरे सपनों का भारत— गौरवशाली इतिहास

मेरे सपनों का भारत वो भारत है… जिसकी गौरव गाथाहै स्वयं हिमालय गाताहिंद प्रशांत पैर पखारेंवो भारत भाग्य विधाता है जिसका स्वर्णिम इतिहासऔर भविष्य उज्ज्वल हैमाना वर्तमान चुनौतिपूर्णलेकिन भाग्य अति प्रबल है यूँ ही नहीं माना विश्वगुरू हमेंजगत में हमने कार्य महान किएजीत कर त्रिलोकी भी हमनेसिंहासन हैं दान किए हमने ही विश्व को दिया … Read more