सोने की चिड़िया- मेरे सपनों का भारत

मेरे सपनों का भारत, जहाँ रहते हों सब मिलजुल कर, हो भाई चारा। ना आमदनी की चिंता, ना खर्चने का दुख… अमन चैन हो चारो ओर। यह अमीरी और गरीबी से परे हैं भारत…. जाती के भेद भाव से परे है ये भारत। ये कर्म भूमि है बरसों से… इसे कर्मों ने ही बिगाड़ा है … Read more

आज़ादी by Nandlal Ahi (Aazadi Amrit Mahotsav- 75th Independence Day)

खून की होली तुमने बहुत खेल ली , आ गयी मेरी बारी संभल जाइए। गर नहीं है तुम्हें देश मेरा पसंद, देश द्रोही यहाँ से निकल जाइये ।आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी , लाखों लोगों ने अपने प्राणों से कीमत चुकाई थी ।तिरंगा लेहराता है आज पूरी कीमत से , हमें मिली आज़ादी … Read more