अब फर्क नहीं पड़ता

शिकवा लोग से करना छोड़ दिया है, हमने थोड़ी सी खुशी के लिए मरना छोड़ दिया है। अब आए तो फर्क नहीं जाए तो फर्क नहीं, कुछ इस तरीके से हमने खुद को रोक लिया है। और शिकवा हमने करना छोड़ दिया है, अब रूठना छोड़ दिया है, मनाना छोड़ दिया है, जमाने को गम … Read more

लम्हों के मोहताज

आसमान का सितारा बन कर , क्या मिला सब के आंखों का तारा बन कर। बनना चाहा जिंदगी किसी की, रह गये तमाशा बन कर। ढुढा सारे जहां में मिला कहीं नहीं, पता नहीं खोई कहाँ हे, ये किस्मत की लकीर। जो मिलेगा कभी नहीं। ये खेल किस्मत की है, वरना कोई मिल कर खोता … Read more