सिंगरौली

जय-जय सिंगरौली,

ऊर्जा की खान,

तेरी कोख में काला सोना,

तेरे माथे पर सम्मान।

जहाँ रिहंद लहराए जैसे चाँदी की धार,

गोविंद बल्लभ पंत सागर देखे तो,

मन हो जाए निहाल।

जी हाँ, काला सोना यहीं से निकलता है,

इसी की आग से पुरा हिंदुस्तान चमकता है।

एन.टी.पी.सी, विंध्याचल-बिजली के घर यहीं हैं,

ऊर्जा की राजधानी का ताज़, सिंगरौली के सर यहीं है।

रिहंद की चादर गोविंद बल्लभ पंत सागर कहलाता है,

माड़ा की गुफाओं में लाखों साल का इतिहास मिल जाता है।

कर्मा की थाप बजे, जब मंडल थिरकता है।

गोंड़-बैगा के सुरों से, कण-कण महकता है।

कोयले से लिपटी बिजली से सजी,

ये नगरी है भारत की सबसे बड़ी।

खदानों की गहराई, पसीने की धार,

इसी से चलता है, देश का कारोबार।

काली मिट्टी में भी, तेरी सोने की चमक है,

तेरी ही बिजली से, घर घर में चहक है।

धूल नहीं तू, तू तो देश का अभिमान है,

सिंगरौली जिला नहीं तू,

तू तो भारत का स्वाभिमान है।

By Himanshu Kumar, DAV Dudhichua

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