मेरे सपनों का भारत

यह बदलता भारत देश हैप्यारा वतन मेरा और तुम्हारा हैविविधता और आध्यात्म से भरानिराला इतिहास हमारा है नई राह मिली है, उस परदेश को आगे बढ़ाना है ।विश्व की सर्वोच्च राजगद्दी परभारत को बिठाना है!विभिन्न जातियों और धर्मों कोएक साथ मिलाना हैज्ञान – विज्ञान की तकनीकों सेदेश को गौरव दिलाना है! अपने प्राणों पर खेलकर … Read more

है वह ऐसा पिता

हार जाता है वह संघर्षों तले,आह‌ भी ना निकाले है, वह ऐसा पिता।कैसे आंगन की हरियाली, इतनी हरी मां तो है,पर संभाले जड़ है पिता।जोड़ती हूं खुद की कमाई,कौड़िया उतनी ही कौड़ी में,संभाले घर है पिता।हार जाता है वह संघर्षों तले, आह भी ना निकाले है, वह ऐसा पिता।By रिचा पाठक मैं रिचा घनश्याम पाठक … Read more