1947 में कुछ लोगों ने दिया था अपना योगदान,
वहीं पर कुछ लोगों ने दिया था अपना बलिदान।
23 मार्च 1931 की रात थी,
भगत सिंह की फाँसी की बात थी।
भगत सिंह फाँसी से पहले पढ़ रहे थे लेनिन की किताब,
मगर आज तक नहीं माँगा अंग्रेजों से फाँसी का हिसाब।
अंग्रेज जीत रहे थे हथियार और गोलियों के दम पर,
गांधी जी जीत रहे थे सत्य अहिंसा के दम पर।
चंद्रशेखर जी ने कसम खाई थी,
खुद अपने हाथ से मर जाऊँगा,
मगर कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आऊँगा।
1947 में कुछ लोगों ने दिया था अपना योगदान,
वहीं पर कुछ लोगों ने दिया था अपना बलिदान।
इनके बलिदान को कोई भारतीय भुला नहीं सकता,
अंग्रेज भी इनके बलिदान को कभी भूल से खरीद नहीं सकता।
लक्ष्मी बाई जी का नाता था तलवार और बादल घोड़े से,
आज तक नहीं रखा नाता अंग्रेजों की गोली से!
By Ananya Jaiswal, DAV Amlohri